भीलवाड़ा, 9 अप्रेल। श्री महाशिवपुराण कथा का श्रवण कराने मेवाड़ की पावन धरा भीलवाड़ा की भूमि पर पहली बार पधारे प्रख्यात कथावाचक ‘कुबेर भण्डारी’ पंडित प्रदीप मिश्रा के मुखारबिंद से कथा सुनने के लिए विशाल जनसमूह इस कदर उमड़ रहा है कि सात दिवसीय कथा के दूसरे दिन गुरूवार को मेडिसिटी ग्राउण्ड के साढ़े चार लाख वर्ग फीट में फैले डोम ओर पाइप पांडाल में पैर रखने की जगह नहीं बची तो आस्था व भक्ति से ओतप्रोत श्रद्धालु बाहरी क्षेत्र में जहां जगह मिली वहीं बैठ कथा सुनने लगे। कथा विश्राम के बाद वहां की पावन रज सिर पर लगाने के बाद ही श्रद्धालु पांडाल से बाहर निकले। कथा के दूसरे दिन भी पंडित प्रदीप मिश्रा संकटमोचन हनुमान मंदिर के महन्त बाबूगिरी महाराज के साथ कथास्थल मेडिसिटी ग्राउण्ड के मंच पर पहुंचे तो विशाल पांडाल ‘श्री शिवाय नमस्तुभ्यं’ ओर हर हर महादेव के जयकारों से गूंजायमान हो उठा। कथा में पंडित प्रदीप मिश्रा ने शिव महापुराण के प्रसंग की चर्चा करते हुए कहा कि हर शहर ओर परिवार में एक ‘मंथरा’ घूमती रहती है जो तुम्हारे पास भी आएगी। वह यह देखती है कि किसके माता पिता के संस्कार कैसे है क्योंकि वहीं संस्कार संतान के अंदर आते है। मंथरा भड़काने का कार्य करती है कानो में धीमा जहर देती है। मंथरा की बातों को ध्यान देकर सुन लिया तो घर टूट कर रहता है। उन्होंने कहा कि लोहे को लोहा ही काटता है उसी तरह दूसरों की सुनने से बिगड़ा है तो शिव महापुराण कथा सुनने से सुधरना शुरू हो जाएगा। जीवन के 16 संस्कारों में चेहरे पर प्रसन्नता रहनी चाहिए। अंतिम संस्कार के समय भी चेहरे पर प्रसन्नता रहे कि संसार छोड़ परमात्मा से मिलने जा रहा हूं। जिंदगी में कितना भी दुःख या सुख आ जाए समभाव में रहे। महाराजश्री ने कहा कि व्यक्ति पत्नी के साथ सात फेरे लेते ही पशुपतिनाथ बन जाता है। जीवन में तीर्थयात्रा जरूर करे वहां भक्ति व शक्ति मिलती है। दुनिया में भगवान शंकर के 12 ज्योर्तिलिग के दर्शन तकदीर बदल देते है। इनके दर्शन करने पर मनुष्य का समय ओर तकदीर बदलने का सामर्थ्य मिलता है। इन 12 ज्योर्तिलिंग पर नहीं जा सकते तो घर के समीप शिवलिंग पर जल चढ़ाने पर भी भगवान शिव स्वीकार करते है। कथा के दूसरे दिन कथा के प्रारंभ में व्यास पीठ पर विराजित पंडित मिश्रा का अभिनंदन करने वालों में महन्त बाबूगिरी महाराज के साथ हाथीभाटा आश्रम के महंत संतदास महाराज, संत लालदास महाराज आदि शामिल थे। कथा के दौरान पहुंचे जयपुर हवामहल के विधायक बालमुंकदाचार्य ने व्यास पीठ पर विराजित पंडित प्रदीप मिश्रा का अभिनंदन कर आशीर्वाद लिया। दूसरे दिन की कथा विश्राम पर व्यास पीठ की आरती करने वालों में विधायक बालमुंकदाचार्य, राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य वरिष्ठ प्रचारक सुरेशजी भाईसाहब, विभाग प्रचारक दीपकजी भाईसाहब, वरिष्ठ प्रचारक रविन्द्र जाजू, राजेन्द्रजी, कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष कैलाश व्यास, मुकेश खण्डेलवाल, सुनील रेणु जागेटिया, आज के जजमान रामप्रकाश बहेड़िया, राजेश संजय बाहेती, प्रदीप बल्दवा, दिनेश अजमेरा, विकास समदानी, दामोदर मूंदड़ा, श्याम डाड, पीयूष डाड, पवन पंवार, मंजू पोखरना आदि शामिल थे। अतिथियों का स्वागत आयोजन समिति के अध्यक्ष विधायक अशोक कोठारी ने किया। आभार आयोजन समिति के कार्यकारी अध्यक्ष राधेश्याम सोमानी ने जताया। कथा समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुनील जागेटिया ने बताया कि कथा 14 अप्रेल तक प्रतिदिन दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक होगी। कथा पांडाल में श्रद्धालु के लिए सभी जरूरी प्रबंध किए गए है।
*शिव को पाना है तो अहंकार ओर अभिमान का करो त्याग*
कथा में पंडित प्रदीप मिश्रा ने सनातन धर्म के प्रति श्रद्धा एवं आस्था रखने की प्रेरणा देते हुए कहा कि मन की शुद्धता के बिना भगवान शिव की प्राप्ति नहीं हो सकती। जब इंसान दुनिया की ठोकर खा लेता है तो देवाधिदेव महादेव की शरण में जाने पर उसका जीवन सार्थक होता है। शिव के प्रति हमारी आस्था अडिग रहनी चाहिए। बिना भरोसे के भगवान की प्राप्ति नहीं हो सकती। जब कोई आसरा नहीं दिखे तो दुनिया से भाग्य मत पूछो बल्कि तब मेरे महादेव को एक लोटा जल चढ़ाना शुरू करो सारी राहे खुल जाएगी ओर भाग्य बदल जाएगा। उन्होंने कहा कि जिसने अभिमान ओर अहंकार का त्याग कर दिया उसे शिव की प्राप्ति हो सकती है। सृष्टि के रचियता, उसे चलाने वाले ओर उसका संहारकर्ता केवल महादेव है। शिव कृपा पानी है तो भक्ति के साथ बिल्व पत्र पर शहद लगा कर चढ़ाए।
*इसीलिए पत्नी अर्धांगिनी कहलाती है*
पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि पत्नी को कभी ये नहीं कहे कि दिन भर क्या करती हो। एक दिन वह कुछ भी नहीं करे तो पता चल जाएगा कि वह दिन भर क्या करती है। पति का आधे से ज्यादा तनाव को पत्नी झेल लेती है इसीलिए वह अर्धागिनी कहलाती है। पत्नी जब भोजन कराती है तो मातृत्व का रूप धारण कर लेती है। पति संकट ओर तकलीफ में हो तो संगिनी व चामुण्डा बन टूट पड़ती है।
*वो काशी रहने वाला बाबा भोलेनाथ चाहिए पर जमकर झूमे श्रद्धालु*
कथा के दौरान मंच से वो काशी रहने वाला बाबा भोलेनाथ चाहिए, अपनी किस्मत का ताला खोलते चलो श्री शिवाय नमस्तुभ्यं बोलते चलो जैसे भजन गाए गए तो हजारों श्रद्धालु विशेषकर महिला भक्त अपने स्थानों पर खड़ा होकर झूमते रहे। पांडाल के अंदर हो या बाहर हर तरफ भक्ति से ओतप्रोत श्रद्धालु ऐसे भजनों की रसगंगा में डूबकी लगाते नजर आए।
*जिन श्रद्धालुओं पत्र पढ़े उन्हें मंच पर बुलाया*
कथा के दौरान मंच से पंडित मिश्रा ने कुछ श्रद्धालुओं के पत्र पढ़े जिसमें बताया गया था कि उनकी समस्याओं का निदान किस तरह शिव भक्ति से हुआ। ऐसे श्रद्धालुओं को परिवार सहित मंच पर भी बुला पंडित मिश्रा ने अपने हाथों से बिल्व पत्र प्रदान किया। जिन श्रद्धालुओं के पत्र पढ़ उनमें भीलवाड़ा निवासी बीना यादव, रेणु सोमानी, लक्ष्मी सेन, कोराई की सोनू सेन, बडगांव अजमेर की सूरजकंवर राठौड़,सीतामउ की हेमकंवर चौहान आदि शामिल थे।
*आयोजन समिति ने आधी रात पांडाल में पहुंच जाने श्रद्धालुओं के हाल*
श्री शिव महापुराण कथा सुनने के लिए देश के विभिन्न क्षेत्रों से भीलवाड़ा पहुंचे हजारों श्रद्धालु कथा पांडाल में ही ठहरे हुए है। ऐसे श्रद्धालुओं को कोई तकलीफ नहीं आए इसके लिए आयोजन समिति के पदाधिकारी अध्यक्ष विधायक अशोक कोठारी के नेतृत्व में समर्पित भाव से सेवा दे रहे है। विधायक कोठारी ने श्रद्धालुओं के साथ ही भोजन कर उनके हालचाल पूछे। आयोजन समिति के कार्यकारी अध्यक्ष राधेश्याम सोमानी एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुनील जागेटिया भी बुधवार मध्यरात्रि पांडाल में पहुंचे ओर वहां ठहरे श्रद्धालुओं से बातचीत कर उनके हाल जाने ओर किसी ने कोई समस्या बताई तो उसका समाधान कराया।
Author: shiningmarwar
Super







